Drop Down MenusCSS Drop Down MenuPure CSS Dropdown Menu
Showing posts with label Love Poem. Show all posts
Showing posts with label Love Poem. Show all posts

यूँ ही कभी बेरंग सा मौसम हो



यूँ ही कभी बेरंग सा मौसम हो,
तो तुम आओ।
ख्वाबों पर गम का पहरा हो,
तो तुम आओ।
मतबाले बादल घिरने को हों,
तो तुम आओ।

हुस्न-ओ-अदा महताब सा चेहरा


हुस्न-ओ-अदा महताब सा चेहरा।
फूल सा खिलता गुलाब सा चेहरा।

अन्दाज़-ए-सादगी का आलम तो देखिए।
महक रहा है ख्वाब सा चेहरा।

उसकी अदाएं कुछ ऐसी थी


उसकी अदाएं कुछ ऐसी थी या फिर,
मेरे देखने का अंदाज़ की कुछ ऐसा था।
जब भी वो शरमा जाया करती थी,
मुझ पर तो क़यामत ही ढाया करती थी।

जब भी तुम्हें देखा करता था


जब भी तुम्हें देखा करता था।
बस तुम्हें ही देखा करता था।
वक़्त गुज़र जाता था एक,
पल मैं ना जाने कितना।

बाग़-ओ-बहार


बाग़-ओ-बहार, गुल-ओ-गुलज़ार का मौसम।
लो आ गया तुम्हारे दीदार का मौसम।
यह पंछियों की चेहक, गुलाबों की मेहक।
यह है मेरे मेहबूब तुम्हारी अदाओं का मौसम।

मिला-जुला अनुभब


मिला-जुला अनुभब सा रहा।
तुझसे मिलना ख्वाब सा रहा।
कुछ तोर तरीकों से भरी साँझ।
इसमें तेरा आना मेहताब सा रहा।

रोशन मुख पे यह चाँद


रोशन मुख पे यह चाँद तुम्हारा।
बिंदियां तुम्हारी या स्वप्न हमारा।
नाज़ुक कलाई में कँगन खनकता।
मधुर सा जैसे कोई साज हो बजता।

श्रृंगार तेरा


श्रृंगार तेरा।
यौवन तेरा ।
मधुबन में आना तेरा।
रस भर, भर भर कर।