टूटी बिखरी ही सही एक उम्मीद


टूटी बिखरी ही सही एक उम्मीद तो पाली है मैने।
तेरे जाने के बाद तेरी याद ही संभाली है  मैने।

तू साथ रहे न रहे यह वक़्त तो वैसे भी गुजर ही जायेगा।
बस तन्हाई के लम्हातों में तेरा साथ नही मिल पायेगा।

दर्द है मोहब्बत है और मैं हूँ


दर्द है मोहब्बत है और मैं हूँ।
ख्वाब हैं सिरहन है और मैं हूँ।
रास्ता है तन्हाई है और मैं हूँ।
चुभन है ख़ामोशी है और मैं हूँ।
रंजिशें हैं सितमगर हैं और मैं हूँ।

वो बेताब सी ख़ामोशी मेरी



वो बेताब सी ख़ामोशी मेरी आज कल तेरे चेहरे से बयां होती है।
दो पल की जुदाई भी अब तुमको नाकाबिल-ए-बर्दाश्त होती है।

मेरी मज़बूरियों का सफर


मेरी मज़बूरियों का सफर कुछ ऐसा रहा।
तू पास हो के भी मुझसे बहुत दूर रहा।
तन्हाई पलती रही साथ साथ मेरे कुछ यूँ।
कि पल भर के साथ को भी दिल तरसता रहा।

कुछ भूली हुई यादों


कुछ भूली हुई यादों का जमघट लगने लगा है।
मेरा यह पागल मन फिर तड़पने लगा है।
एक रूठा हुआ साथी जो बिछड़ा था कहीं।
फिर वो मुझको जाने क्यों याद आने लगा है।

मुझे वो ख़्वाब सा लगता है


मुझे वो ख़्वाब सा लगता है।
शक़्स जो महताब सा लगता है।