कोई ग़ज़ल लिख दूँ


कोई ग़ज़ल लिख दूँ या कोई गीत लिख दूँ।
नाम तुम्हारे अपनी सुबह-शाम लिख दूँ।
ना क़रार में रहूँ ना बेकरार रहूँ।
तुम्हारी नज़र के सदके हर आम-ओ-खास लिख दूँ।

बुद्धि तर्क ज्ञान का भण्डार


बुद्धि तर्क ज्ञान का भण्डार।
सबसे महान है वो अवतार।
अनंतकाल तक आश्चार्य निर्माता।
वेद् पुराण सबका है ज्ञाता।

एक उलझन से निकलता हूँ


एक उलझन से निकलता हूँ तो दूसरी में उलझ जाता हूँ।
ज़िन्दगी यूँ ही बीत जाती है और मैं जीना भूल जाता हूँ।

हुस्न-ओ-अदा महताब सा चेहरा


हुस्न-ओ-अदा महताब सा चेहरा।
फूल सा खिलता गुलाब सा चेहरा।

अन्दाज़-ए-सादगी का आलम तो देखिए।
महक रहा है ख्वाब सा चेहरा।

शाम ढलती है तो उदासी


शाम ढलती है तो उदासी भी साथ आती है।
एक बेहरम सी तन्हाई भी साथ आती है।
जिक्र निकलता है जब ग़ज़ल में मोहब्बत का।
वो हर रात आंसुओं संग गुजर जाती है।

ढूंढ रहा हूँ एक रास्ता


ढूंढ रहा हूँ एक रास्ता।
मिले जो मुझको बाबस्ता।
कहीं तो होगी मंज़िल मेरी।
कहीं तो होगा ठिकाना मेरा।