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रोशन मुख पे यह चाँद


रोशन मुख पे यह चाँद तुम्हारा।
बिंदियां तुम्हारी या स्वप्न हमारा।
नाज़ुक कलाई में कँगन खनकता।
मधुर सा जैसे कोई साज हो बजता।
होंठ पन्खुड़ियाँ या शवाब तुम्हारा।
गुलशन तुम और यह गुल तुम्हारा।
गेसू हैं तुम्हारे या शाम का आइना।
इन खुली लटों से ऐसे न भरमाना।



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